‘सच को बनाया जाता है’

By | Nikhil Pandey

2 Poems

आजकल सच जैसा कुछ होता नहीं
सच को बनाया जाता है
तड़पती-फड़कती ख़बरों को दिनभर
चैनलों पर चलाया जाता हैं
फिर कई बार सुनी बात
सच्ची-सी लगने लगती है
अफ़वाहें भी लोगों के बीच
ख़बरें बनने लगती हैं
टीआरपी बढ़ने लगती है
अक्ल घटने लगती है
सही ग़लत की पहचान से
नज़रें हटने लगती हैं
प्रश्नों के घेरे में क्यों वही खड़ा नजर आता है?
जो सच की तलाश में प्रश्न उठाता है।

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