रास्ते

By | Meena Sood

4 Poems

सीला-सीला सा है मन..
बारिश की गिरती बूँदें
देखो सीली हुई ज़मीं भी ..
ये बिन मौसम बरसात है
या मेरे ही मन की बात है??..
सड़क पर तेज़ दौड़ती गाड़ियां
गुमां होता है मानों कुछ छूट रहा हो
वहीं सामने से आती तेज़ रोशनी
सीले रास्तों से मिलकर
प्रतिबिम्ब बनाती है स्मृतियों का
और
और उजली होती हैं राहें…
जान गयी हूँ मैं
जो पीछे छूटता है वो भूलता नहीं
रोशन करता है राहों को
और मैं
एक बार फिर मुस्कुराकर
कुछ और आत्म विश्वास के साथ
अपना अगला कदम बढ़ा देती हूँ
एक अनजान नयी मंज़िल की ओर

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