ख्वाइशें अधूरी रह गई तेरे दीदार में

By | Yatharth Gupta

7 Poems

ख्वाइशें अधूरी रह गई तेरे दीदार में,
बिक रहा हूँ आज एक बंद बाजार में,
सन्नाटे से छाये मंजर दिखाई पड़ते हैं,
अफवाहें फैली हैं मौसम की बहार में,
आसमाँ में तारों का चमकना बेहिसाब,
मगर चाँद बैठा है घर पे तेरे इंतजार में,
वसंत जब आये तब आये इस गरीबखाने में,
इक फूल महकता रहेगा तेरे ही आसार में,
विनाश तेरा चरम सीमा पर है “गुप्ता”,
अभिमान कम रख तू है जलते भ्रमाण्ड में।

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