कॉमरेड

By | Shashi Pathak

1 Poem

कॉमरेड,

लड़ाई एक दिन की नहीं
लड़ाई एक दिन के लिए है
एक दिन जब लड़ने को
कोई नहीं होगा
ये लड़ाई जीत की नहीं
सबके हित की है
तुम उठ यहाँ आए
खड़े समाज के चौराहे पे
समाज को आइना दिखाने
पर समाज से लड़ने नहीं

समाज को लड़ना सिखाने
दुश्मन ये लोग नहीं
जो तुम्हें लड़ने से रोकते है
दुश्मन वो सोच है
जो तुम्हें सच बोलने से
सच देखने से
और सच सुनने से रोकता है
आज अगर लड़ गये
तो कल रहे ना रहें
सच ज़रूर रहेगा
और सच बोलने वालों
में डर नहीं रहेगा।

कॉमरेड
आज अगर लड़ गये
तो कल लड़ने को
एक कॉमरेड फिर रहेगा।

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