इस बार जब भी आओ

By | Anuj Pareek

5 Poems

मैंने अपने हिस्से के सारे सुख
बचा रखे हैं तुम्हारे लिए
इस बार जब भी आओ
अपने सारे दुःख, दर्द, आँसू
समेट लाना एक पोटली में।
मैं उस पोटली को बिना खोले
रख लूँगा

यह भी नहीं कहूँगा कि
तुम अपना हाथ आगे करो
मैं इसे थामना चाहता हूं।
मैं दबा दूँगा मेरी इस इच्छा को भी उन
ख्वाबों की तरह जो कभी मुकम्मल
नहीं होते।

ये सब जानते हुए भी कि मेरी
इस ख़्वाहिश का पूरा होना
मुकद्दर में नहीं तब भी मैं
इसी वादे के साथ हमेशा तुम्हारा हाथ
थामे रखना चाहूँगा,

जब तक कि नब्ज़ बन्द नहीं हो जाती।
मैं जानता हूं ये सब तुम्हें नागवार होगा
लेकिन तब भी मेरा हाथ बिन बढ़ाए
गुरुत्वाकर्षण के नियम की तरह
तुम्हारी ही तरफ होगा।।

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