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Poetry

कॉमरेड

कॉमरेड, लड़ाई एक दिन की नहीं लड़ाई एक दिन के लिए है एक दिन जब लड़ने को कोई नहीं होगा ये लड़ाई जीत की नहीं सबके हित की है तुम उठ यहाँ आए खड़े समाज के चौराहे पे समाज को आइना दिखाने पर समाज से लड़ने नहीं समाज को लड़ना सिखाने दुश्मन ये लोग नहीं जो तुम्हें लड़ने से रोकते है दुश्मन वो सोच है जो तुम्हें सच बोलने से सच देखने से और सच सुनने से रोकता है… Read More

By | Shashi Pathak | 17th Oct 2019Leave a Comment

कई शहरों में इक ऊँची दुकान है |

कई शहरों में इक ऊँची दुकान है, मासूम ये तमाशा देख परेशान है, नयी इमारतें खड़ी हुई शहरों… Read More

By | Yatharth Gupta | 19th Oct 2019Leave a Comment

महक उठे हर ज़र्रा मेरा

बरस के आसमान ने धरती से कहा यह  प्रणय निवेदन स्वीकार करो मेरा   लजा के, कुछ मुस्कुरा… Read More

By | Meena Sood | 15th Oct 2019Leave a Comment

The Holy Courtyard

So I have come, breaking the silence I was sceptical, yet I know when you called me It… Read More

By | Rohit Bhanja Chowdhury | 15th Oct 2019Leave a Comment

वैश्या का वर्जिन होना

ईमानदार होना बस इतना ही सच है जब तक पकड़े ना जाना और एक नेता का ईमानदार होना… Read More

By | Anuj Pareek | 15th Oct 2019Leave a Comment

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Rosary of Sonnets

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